NEXT 6 जनवरी, 2025 श्रीडूंगरगढ़। घुटनों के दर्द, ऑस्टियोआर्थराइटिस, टेनिस एल्बो और स्पोर्ट्स इंजरी से जूझ रहे मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सरकारी मेडिकल कॉलेज बीकानेर में प्रदेश की पहली ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर (OBRC) लैब शुरू हो गई है। इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए अब मरीजों का इलाज बिना ऑपरेशन और बिना चीर-फाड़ संभव होगा।
पीबीएम अस्पताल से संबद्ध ट्रोमा अस्पताल में मंगलवार को इस लैब का ट्रायल शुरू किया गया। पहले दिन पांच मरीजों को इंजेक्शन लगाकर उपचार किया गया। अब प्रत्येक मंगलवार को इस तकनीक से मरीजों का इलाज किया जाएगा।
अपने ही खून से बनेगा उपचार टीका
पीबीएम अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने बताया कि यह लैब जीएफसी कन्सन्ट्रेट तकनीक पर काम करेगी। मरीज के स्वयं के रक्त और बोन मैरो से ब्लड कंपोनेंट्स को संकेंद्रित कर उपचार टीका तैयार किया जाएगा। इससे शरीर में प्राकृतिक हीलिंग प्रक्रिया तेज होती है और टिशू रिपेयर होता है।
उन्होंने बताया कि यह तकनीक विशेष रूप से ऑस्टियोआर्थराइटिस ग्रेड-1 और ग्रेड-2 में बेहद प्रभावी है। इलाज पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है।
पीआरपी से ज्यादा प्रभावी तकनीक
ट्रोमा हॉस्पिटल प्रभारी और वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. बी.एल. खजोटिया ने बताया कि यह तकनीक पारंपरिक पीआरपी तकनीक से अलग और अधिक प्रभावी है। इसमें कन्सन्ट्रेट का उपयोग किया जाता है, जिससे बेहतर परिणाम मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि ओबीआरसी लैब हड्डी और मस्क्यूलोस्केलेटल बीमारियों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी और पीबीएम अस्पताल को चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।
1 घंटे में इलाज, उसी दिन घर वापसी
वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कपूर ने बताया कि यह एक ओपीडी आधारित डे-केयर प्रक्रिया है। मरीज करीब एक घंटे में इलाज कराकर घर जा सकता है। इसमें न तो ऑपरेशन होता है और न ही किसी बाहरी रसायन का उपयोग किया जाता है।
इन बीमारियों में मिलेगा फायदा
इस तकनीक का उपयोग
– घुटनों का दर्द और ऑस्टियोआर्थराइटिस
– टेनिस एल्बो, गोल्फर एल्बो
– शोल्डर (रोटेटर कफ, फ्रोजन शोल्डर)
– कार्टिलेज और मेनिस्कस इंजरी
– स्पोर्ट्स इंजरी
– हड्डियों का डिलेड व नॉन यूनियन
– प्लांटर फेशियाइटिस और डिस्क प्रोलैप्स
जैसी बीमारियों में किया जाएगा।
भामाशाह के सहयोग से बनी लैब
डॉ. कपूर ने बताया कि लैब की स्थापना में नोखा के भामाशाह मघाराम कुलरिया का सहयोग रहा है। इसके अलावा एमपी-एमएलए लैड से भी फंड की मांग की गई है। ओबीआरसी लैब की स्थापना के बाद शीघ्र ही ऑर्थोपेडिक मेडिकल रिसर्च सेंटर भी शुरू किया जाएगा।







